दौड़ना बंद करो और ठहेर जाओ।

दौड़ना बंद कर देने और ठहेर जाने का मतलब घर परिवार छोड कर जंगल जाना नही है। दौड़ बंद करने और ठहेर जाने का मतलब सबकुछ छोड़ कर आंखे बंद करके बैठना भी नही है। दौड़ बंद कर देना और ठहेर जाने का मतलब है भीतर ठहेर जाना। भीतर दौड़ का बंद हो जाना। अपने भीतर पूरी तरह से स्थिर और शांत हो जाना। दौड़ मन की है एवं मन का मतलब विवशता (compulsiveness). ठहेर जाने का अर्थ है कोई भी काम विवशता वश या लाचारी वश नही बल्कि ज़रूरत मुताबिक़ करना। अभी अगर थोड़ा ध्यान आप दे तो पाएँगे की आपके सारे काम विवशता वश है ऐसे जैसे की बेहोशी में या ऐसे जैसेकोई आप से करवा रहा है और आप बेहोशी में वो सब कर रहे हैं। क्योंकी मन का दूसरा नाम विवशता यानि बेहोशी यानि unconsciousness है 

ठहेर जाना मतलब इस क्षण में या वर्तमान में ठहेर जाना। येदि आपकी चेतना या ऊर्जा जो काम आप करते है उसके साथ रहती है तो आप उस क्षण में ठहेर गये है। जहां आप है वहाँ आपका होना मतलब ठहेर जाना या वर्तमान में होना है। साथ ही ठहेर जाने का मतलब है कोई काम किया तो भी ठीक और नही किया तो भी ठीक। इस क्षण में किसी काम के प्रति कोई अनिवार्यता (compulsiveness ) या जल्दबाज़ी (desperation) नही। 

मुझे कुछ भी बनना है या कुछ करना है यानि संकल्प और विकल्प को बंद कर दो। जो भी करना है या आप करना चाहते है उसे करो लेकिन उसको लेकर जो लगातार संकल्प विकल्प बने रहते है उन्हें बंद कर देना ही ठहेर जाना है। 

मन और कुछ नही ऊर्जा है। उस ऊर्जा के उठाव के प्रति सजग रहिए। ऊर्जा को बाहर जाने से रोकना ही मन की दौड़ को बंद करने का एक मात्र तरीक़ा और एक मात्र साधना है। ऊर्जा का बाहर की और बहना मतलब मन की दौड़। मन यानि संसार क्योंकि दौड़ हमेशा बाहर की होती है। ये जो आवागमन या जीवन मृत्यु का फेरा है उसका एक मात्र कारण मन की दौड़ या संकल्प विकल्प ही है। इनका बंद हो जाना ही मन की दौड़ का बंद होना और ठहेर जाना है। 

भीतर की दौड़ यानि मन की दौड़ का बंद हो जाना। दौड़ हमेशा मन की होती है। शरीर तो केवल एक माध्यम है मन की दौड़ को क्रियान्वित या पूरा करने का। जब तक दौड़ है, यह शरीर है क्यों की दौड़ और शरीर का सीधा सम्बंध है। दौड़ यानि मन और शरीर मन के कारण ही है। मन यदि समाप्त होजाए यानि दौड़ यदि बंद हो जाए तो शरीर का होना भी समाप्त हो जाता है क्योंकी शरीर इसीलिए मिलता है ताकि मन की दौड़ पूरी की जा सके। इसलिए एक मात्र साधना और काम जो आपको करना है वह यह की कुछ भी करो या कुछ भी आपके भीतर घटित हो लेकिन आप भीतर हमेशा शांत और स्थिर बने रहे. 

ध्यान (meditation) एक मात्र ऐसी साधना या तरीक़ा है जो मन की दौड़ कोबंद करके आपको भीतर से शांत और स्थिर बनाता है। मन का मन में विश्राम, मन का मन में ठहेर जाना, ऊर्जा का ऊर्जा में ठहेर जाना ही ध्यान है…… 

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