यदि मृत्यु को जानना है, तो अपनी नींद को जानो
क्योंकि दोनों समान है। मृत्यु और नींद में कुछ खास अंतर नही है। अंतर इतना ही है की नींद छोटी मृत्यु है और मृत्यु बड़ी नींद है। नींद के बाद आप वापस जागते है, तो मृत्यु के बाद भी आप फिर से अवश्य जागते है। फर्क इतना ही होता है की नींद के बाद आप पुनः उसी शरीर में जागते है जबकि मृत्योपरांत आप दूसरे शरीर में जागते है । नींद भी बेहोशी (unconsciousness) है और मृत्यु भी बेहोशी है। आप नींद का अनुभव नही कर पाते क्योंकि नींद के तुरंत पहले आप बेहोश हो जाते है यानी, आप अपनी जागरूकता (awareness) खो देते है। बिल्कुल उसी तरह मृत्यु के तुरंत पहले आप अपनी चेतना खो देते है और आप मृत्यु का अनुभव नही कर पाते। इसी चेतना या जागरूकता के अभाव के चलते आप कभी नही जान पाते की आपने नींद में कब प्रवेश किया। और इसी वजह से आप यह भी कभी नही जान पाते की आपने मृत्यु में प्रवेश कब किया। नींद और मृत्यु दोनों में ही आप बेहोशी के कारण सचेत नही उतर पाते है।
नींद और मृत्यु ओर कुछ नही मन की ही अलग-अलग अवस्थाएँ है। मन यानी बेहोशी या चेतना या सजगता का अभाव। नींद के तुरंत पहले आपका मन कुछ समय के लिए खो जाता है लेकिन समाप्त नही होता और वही मन आपके जागने के साथ ही फिर से जाग जाता है और फिर से अपना काम शुरू कर देता है। बिल्कुल ऐसा ही कुछ मृत्यु के समय और मृत्यु के साथ भी होता है। मृत्यु के साथ शरीर तो नष्ट हो जाता है लेकिन मन (माइंड) समाप्त नही होता। मन बना रहता है मृत्यु के बाद भी सूक्ष्म शरीर के रूप में। यही सूक्ष्म शरीर या मन फिर से नये शरीर में जागता है और अपना काम शुरू कर देता है। इस तरह नींद और मृत्यु दोनों ही इस यात्रा, जिसको हमने जीवन कहा है, मात्र एक अंतराल (interval) की भाँति है। फर्क सिर्फ इतना की नींद छोटा अंतराल है और मृत्यु लम्बा अंतराल है। दोनों ही स्थिति में जीवन लीला बनी रहती है और फिर से चलती है जैसे एक अंतराल के बाद थिएटर में पर्दे पर पिक्चर फिर से शुरू हो जाती है।
इस तरह नींद और मृत्यु, बेहोशी या मन की दो अलग अवस्थाएँ है। नींद के बाद वही शरीर बना रहता है तो मृत्यु के बाद यह यात्रा नए शरीर में शुरू होती है। मृत्यु आपको मुक्त नही कर सकती क्योंकि जिस अवस्था में आप प्रवेश करेंगे, उसी अवस्था में आप जागेंगे भी। नींद में आप, बेहोशी में उतरते है तो जागते भी आप उसी बेहोशी में है। उसी तरह आप मृत्यु में भी बेहोशी में ही उतरते है और फिर से आपका जन्म भी होता तो नए शरीर में है लेकिन वही बेहोशी की स्थिति बरकरार रहती है।
मुक्ति या मोक्ष मतलब इस भौतिक (physical) शरीर से मुक्ति और यह मुक्ति जागकर यानी होश में होते हुए ही हो सकती है। इसके लिए होश को बढ़ाना होगा ताकि आप होश या सजगता के साथ नींद में प्रवेश कर सके। मैं आपको एक राज़ की बात बताना चाहता हूँ ओर वह यह की यदि आप नींद में सचेत होकर उतर जाने में सफल होते है तो एक दिन आप मृत्यु में भी सजगता से उतर पायेंगे। आप मृत्यु के समय भी सजग रह पायेंगे ओर यह सजगता आपको मुक्त करेगी जिसको हमने मोक्ष कहा है मतलब दैहिक अस्तित्व (physical existence) से मुक्ति।
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