“बंद मुट्ठी लाख की, खुली तो खाक की।”
अब इस
मुहावरे का, जिसे हम अपनी आम भाषा में रोजाना इस्तेमाल करते है, सांसारिक संदर्भ में क्या
मतलब है, वह मैं आपको नहीं बताऊँगा, क्योंकि वह तो हम सब जानते है। लेकिन इसका
अध्यात्म के संदर्भ में क्या मतलब और महत्व है, वह मैं आपको बताना चाहूँगा।
देखिये
यहाँ बंद मुट्ठी से, मेरा मतलब उर्जा के बंधें होने से है. यानि की, आपकी ऊर्जा
जब तक बँधी हुई है, आपकी, चेतना जब तक एकजुट है,
एकत्र है, स्थिर या ठहरी हुई है, तो यह बँधी हुई ऊर्जा, ठहरी हुई ऊर्जा, आपको
अध्यात्म के शिखर तक ले जा सकती है।
वास्तव
में, मैं आपको बताऊँ की, अध्यात्म के शिखर यानि बुद्धत्व तक पहुँचने के लिये आपको
और कुछ नहीं करना है, बल्कि अपनी ऊर्जा को ही संभालना है। अपनी ऊर्जा को ही एकत्र
करके रखना है।
और ऐसा
इसलिये, क्योंकि बुद्धत्व की उपलब्धि, ऊर्जा को बांध कर यानि समेट कर ही संभव है।
बिखरी हुई ऊर्जा, की क़ीमत ख़ाक यानि मिट्टी से ज़्यादा नही है। क्योंकि बिखरी हुई
ऊर्जा, यानि उर्जा जो संसार की ओर बह रही है, वह आपके लिये, केवल और
केवल संसार ही इकट्ठा कर सकती है। संसार मतलब, भौतिक और भौतिक मिट्टी से ज़्यादा
नही है। भौतिक का मूल्य, मिट्टी से ज़्यादा नहीं है।
ऊर्जा
का बिखरना या खुलना, मतलब ऊर्जा का बहना है और ऊर्जा जब बहती है, तो हमेशा बाहर
यानि संसार यानि भौतिक की और ही बहती है और आपके लिये भौतिक सुख साधन और सामग्री
ही इकट्ठा कर सकती है।
आपको यहाँ
राजा, महाराजा, सम्राट धनि आदि बना सकती है, लेकिन उसका आध्यात्मिक दृष्टि में कोई
महत्व नहीं है। इसलिए खुली ऊर्जा, खुली मुट्ठी, ख़ाक की तरह से ही है, जो आपके
लिए, ख़ाक यानि नश्वर को ही जमा कर सकती है।
ऊर्जा
का बिखरे हुए होना, अपनी ज़िंदगी यानि इस मानव शरीर में होने के मौक़े को, व्यर्थ
ही गँवाना है। क्योंकि बहती हुई ऊर्जा, आपके लिये संसार एकत्र करेगी और आपको पुनः
एक नये शरीर में लाएगी। क्योंकि अंत में आपको वही मिलता है, जिस पर पूरी ज़िंदगी,
आपका ध्यान रहा। जिधर आपका खिंचाव रहा।
लेकिन
ऊर्जा का ठहर जाना, उर्जा का बंधा हुआ होना यानि उर्जा का बहना रुक जाना, आपको
समाधि दिला सकता है। और ऐसा इसलिये क्योंकि की ऊर्जा जब बहना बंद करके भीतर ही ठहर
जाती है, तो ऊर्जा का रूपांतरण होता है।
रूपांतरित
ऊर्जा, फिर नीचे के रास्ते यानि संसार की और नही बहती, बल्कि ऊर्जा ऊपर उठती है।
ऊर्जा का उधर्वगमन होता है, जो आपको इस शारीरिक अस्तित्व से मुक्ति दिला सकता है।
ऊर्जा का बिखरना सेक्स यानि संसार है और ऊर्जा का बंधा हुआ यानि उर्जा का एकत्रीकरण
समाधि है। बिखरी हुई ऊर्जा का दूसरा नाम मन यानि संसार है। जबकि एकत्र ऊर्जा
डिवाइन हो जाना है। ध्यान यानि मैडिटेशन और कुछ नहीं बल्कि उर्जा के संरक्षण,
उर्जा के एकत्रीकरण की विधि का नाम है.
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