जब तक आपको साँप दिखायी देता है, तब तक आप रस्सी की असलियत को नहीं जान पायेंगे.
( एक निवेदन - मेरे हिंदी के पोस्ट में , व्याकरण सम्बन्धित त्रुटियाँ हो सकती है, ऐसी मुझे आशंका है. मेरी बात आप तक पहुँचती है , तो आप इनको नजरंदाज कर दें.) एक बात आप जानिये और समझिये और वह यह की , आपका करना कभी भी बंद नही हो सकता, जब तक जो भौतिक है, यानि जो आपको दिखाई देता है , उसे आप सच मानते है। यह बिल्कुल वैसे ही है, जैसे की रस्सी में यदि आप साँप देखेंगे, तो आप कुछ ना कुछ अवश्य करेंगे। लकड़ी उठायेंगे, उसे मारने या भगाने के लिये या फिर आप खुद ही भागेंगे स्वयं को बचाने के लिये। क्योंकि आपको जो दिखायी दिया, उसको आपने सच माना. यानि शारीरिक या भौतिक को सच माना, तो आप अपनी प्रतिक्रिया अवश्य करेंगे। प्रतिक्रिया हमेशा, शरीर से और शरीर के लिए ही होती है. लेकिन आप यदि सच को जान ले, तो आप जानेंगे कि बाहर साँप नहीं, बल्कि रस्सी है। रस्सी में साँप होने का भ्रम मात्र है। अभी हम इसी भ्रम की वजह से ही दुखी है। और यही भ्रम हमारे बंधन का कारण भी है। पूरी ज़िंदगी, हम इसी भ्रम में जीते है। और इसी भ्रम के साथ मर भी जाते है। इसलिए फिर से शरीर में आना पड़ता है, क्योंकि इस भ्रम को तोड़ने और असलियत यान...